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निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI) 2024

निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI) 2024: मुख्य बिंदु 1. परिचय और पृष्ठभूमि: जारीकर्ता: नीति आयोग (NITI Aayog)। दिनांक: 14 जनवरी 2026। संस्करण: यह EPI का चौथा (4th) संस्करण है (पहला संस्करण अगस्त 2020 में जारी किया गया था)। उद्देश्य: भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की निर्यात क्षमता और तत्परता का व्यापक मूल्यांकन करना। लक्ष्य: 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के माल निर्यात को प्राप्त करना और 'विकसित भारत @2047' के दृष्टिकोण को साकार करना। 2. सूचकांक का ढांचा (Framework): EPI 2024 को 4 स्तंभों (Pillars), 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों के आधार पर तैयार किया गया है: स्तंभ (Pillars) भार (Weightage) मुख्य उप-स्तंभ (Sub-pillars) व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र (Business Ecosystem) 40% मैक्रोइकॉनॉमी, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, मानव पूंजी, वित्तीय पहुंच, MSME पारिस्थितिकी तंत्र। नीति और शासन (Policy & Governance) 20% राज्य स्तरीय नीति समर्थन, संस्थागत क्षमता, नियामक वातावरण और अनुपालन। निर्यात बुनियादी ढांचा (Export Infrastructure) 20% व्यापार और रसद (Logistics), कनेक्टिविटी, उपयोगिताएँ (Utilities)। निर्यात प्रदर्शन (Export Performance) 20% निर्यात परिणाम, विविधीकरण, वैश्विक एकीकरण। 3. 2024 संस्करण की नई विशेषताएं: इस वर्ष के सूचकांक में मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, मानव पूंजी, वित्तीय पहुंच और MSME पारिस्थितिकी तंत्र जैसे नए आयामों को जोड़ा गया है। जिलों (Districts) को निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता की मुख्य इकाई के रूप में अधिक महत्व दिया गया है। 4. राज्यों का वर्गीकरण: तुलनात्मक मूल्यांकन के लिए राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है: बड़े राज्य (Large States) छोटे राज्य (Small States) उत्तर-पूर्वी राज्य (North East States) केंद्र शासित प्रदेश (Union Territories) प्रदर्शन के आधार पर इन्हें लीडर्स (Leaders), चैलेंजर्स (Challengers) और एस्पायरर्स (Aspirers) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 5. शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य (रैंकिंग): A. बड़े राज्यों की श्रेणी में: महाराष्ट्र (प्रथम स्थान) तमिलनाडु गुजरात उत्तर प्रदेश आंध्र प्रदेश B. छोटे राज्य, उत्तर-पूर्वी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में: उत्तराखंड (प्रथम स्थान) जम्मू और कश्मीर नागालैंड दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव गोवा 6. सूचकांक का महत्व: यह राज्यों को उनकी निर्यात बाधाओं की पहचान करने में मदद करता है। उप-राष्ट्रीय (subnational) स्तर पर नीतिगत सुधारों को प्रोत्साहित करता है। क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में सहायक है। प्रधानमंत्री के 'उत्पादों की गुणवत्ता' (Quality of products) के आह्वान पर बल देता है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सकें।